Wild Animals in Rain
Wild Animals in Rain: बरसात का मौसम इंसानों के लिए जितना राहत लेकर आता है, उतनी ही चुनौतियां जंगल में रहने वाले जानवरों के लिए भी लेकर आता है. तेज बारिश, आंधी, ठंड और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में जंगली जानवर अपनी सुरक्षा के लिए कई अनोखे तरीके अपनाते हैं. उनके पास न तो घर होता है और न ही छाता, लेकिन प्रकृति ने उन्हें ऐसी अद्भुत क्षमताएं दी हैं, जिनकी मदद से वे मुश्किल मौसम में भी खुद को सुरक्षित रखते हैं.आइए जानते हैं कि जंगल के अलग-अलग जानवर बारिश से बचने के लिए क्या करते हैं.
पेड़ों और घनी झाड़ियों का सहारा
हिरण, तेंदुआ, भालू, जंगली सूअर और कई छोटे स्तनधारी जानवर तेज बारिश के दौरान घने पेड़ों, झाड़ियों या चट्टानों की आड़ में चले जाते हैं. इससे वे भीगने के साथ-साथ तेज हवा से भी बच जाते हैं.
गुफाओं और बिलों में छिप जाते हैं
बाघ, लोमड़ी, सियार, खरगोश, नेवला और कई अन्य जानवर प्राकृतिक गुफाओं या अपने बनाए बिलों में शरण लेते हैं. ये स्थान बारिश और ठंडी हवाओं से अच्छी सुरक्षा प्रदान करते हैं.
बंदर चुनते हैं ऊंचे पेड़ों पर सुरक्षित जगह
बारिश शुरू होते ही बंदर पेड़ों की मजबूत और घनी शाखाओं पर बैठ जाते हैं. वे ऐसे स्थान चुनते हैं जहां पत्तियों की घनी छतरी उन्हें सीधे बारिश से बचा सके. कई बार वे एक-दूसरे के करीब बैठकर शरीर की गर्मी भी बनाए रखते हैं.
हाथी लेते हैं बारिश का आनंद
हाथियों की मोटी त्वचा उन्हें बारिश से ज्यादा प्रभावित नहीं होने देती. हल्की बारिश में वे खुले में घूमते रहते हैं, जबकि तेज बारिश और आंधी के समय बड़े पेड़ों या सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाते हैं. बारिश के बाद वे अक्सर मिट्टी स्नान (Mud Bath) करते हैं, जिससे उनकी त्वचा पर कीड़े और परजीवी कम लगते हैं.
सुरक्षित घोंसलों में लौट आते हैं पक्षी
बारिश शुरू होने से पहले कई पक्षी अपने घोंसलों, पेड़ों की खोखली शाखाओं या घनी पत्तियों में छिप जाते हैं. वे अपने पंखों को शरीर से सटाकर रखते हैं ताकि शरीर की गर्मी बनी रहे और पानी कम अंदर पहुंचे.
ऊंचे और सूखे स्थान ढूंढते हैं सरीसृप
सांप, छिपकली और अन्य सरीसृप बारिश के दौरान ऐसे स्थानों की तलाश करते हैं जहां पानी न भरे. भारी बारिश या बाढ़ की स्थिति में वे अक्सर ऊंचे इलाकों की ओर निकल जाते हैं. इसी कारण बरसात में कई बार सांप मानव बस्तियों के आसपास भी दिखाई देने लगते हैं.
सक्रिय हो जाते हैं मेंढक और उभयचर
जहां अधिकांश जानवर बारिश से बचने की कोशिश करते हैं, वहीं मेंढक और कई उभयचर जीव बरसात में सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं. यह मौसम उनके प्रजनन और भोजन खोजने के लिए अनुकूल माना जाता है.
कीट-पतंगे भी अपनाते हैं अलग रणनीति
चींटियां बारिश आने से पहले ही अपने बिलों को मजबूत कर लेती हैं और भोजन इकट्ठा कर लेती हैं. मधुमक्खियां अपने छत्ते में रहती हैं, जबकि तितलियां और कई छोटे कीट पत्तों के नीचे या सुरक्षित जगहों पर छिप जाते हैं.
कम शिकार करते हैं बड़े शिकारी
बाघ, तेंदुआ और अन्य शिकारी जानवर तेज बारिश के दौरान कम सक्रिय रहते हैं. बारिश में गंध और आवाज़ बदल जाने से शिकार करना कठिन हो जाता है. इसलिए वे अक्सर मौसम साफ होने का इंतजार करते हैं.
क्या जंगली जानवरों को बारिश से बीमारियां होती हैं?
हां, लगातार भीगने, ठंड, दूषित पानी और परजीवियों के कारण जंगली जानवरों में भी संक्रमण, त्वचा संबंधी समस्याएं और श्वसन रोग हो सकते हैं. हालांकि, प्राकृतिक चयन और उनके अनुकूल व्यवहार के कारण अधिकांश स्वस्थ जानवर इन परिस्थितियों का सामना कर लेते हैं.
क्या सभी जानवर बारिश का पूर्वानुमान लगा लेते हैं?
कई वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि अनेक जानवर वायुदाब (Air Pressure), नमी, तापमान और वातावरण में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को महसूस कर लेते हैं. यही कारण है कि कई पक्षी, चींटियां और अन्य जीव बारिश शुरू होने से पहले ही सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाते हैं.
जंगल के जानवरों के पास इंसानों जैसी सुविधाएं नहीं होतीं, लेकिन प्रकृति ने उन्हें परिस्थितियों के अनुसार ढलने की अद्भुत क्षमता दी है. कोई गुफा में छिपता है, कोई पेड़ों की आड़ लेता है, तो कोई ऊंचे स्थानों की ओर चला जाता है. यही प्राकृतिक व्यवहार उन्हें बारिश, आंधी और अन्य मौसम संबंधी चुनौतियों से सुरक्षित रखने में मदद करता है. जंगली जीवों की ये अनोखी आदतें हमें प्रकृति के संतुलन और जीवों की अद्भुत अनुकूलन क्षमता के बारे में बहुत कुछ सिखाती हैं.