किसी पक्षी को चोट लग जाए तो फर्स्ट एड कैसे दें?
Bird First Aid: पक्षी चाहे पालतू हो या घायल अवस्था में मिला हो, चोट लगने के बाद उसे तुरंत सही देखभाल की जरूरत होती है। पक्षियों का शरीर काफी नाजुक होता है और चोट के बाद वे जल्दी तनाव या शॉक में जा सकते हैं। ऐसे में घबराकर पक्षी को बार-बार पकड़ने के बजाय पहले उसे सुरक्षित और शांत रखना जरूरी है।फर्स्ट एड का उद्देश्य पक्षी को तत्काल राहत देना और उसकी हालत को स्थिर रखना है। गंभीर चोट होने पर घरेलू उपचार के बजाय जल्द से जल्द पशु चिकित्सक, खासकर एवियन वेटरिनेरियन से संपर्क करना चाहिए।
सबसे पहले पक्षी को सुरक्षित जगह पर रखें
चोट लगने के बाद पक्षी को दूसरे पक्षियों, बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें। उसे एक साफ, छोटे और सुरक्षित बॉक्स या कैरियर में रखा जा सकता है।
बॉक्स के नीचे मुलायम तौलिया या कपड़ा बिछाएं, ताकि पक्षी फिसले नहीं। बॉक्स में पर्याप्त हवा आने-जाने की जगह हो और उसे शांत, कम रोशनी वाली जगह पर रखें।
अगर खून निकल रहा है तो क्या करें?
अगर घाव से खून निकल रहा है, तो साफ गॉज या मुलायम कपड़े की मदद से घाव पर हल्का और लगातार दबाव दें। बार-बार कपड़ा हटाकर खून देखने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे दोबारा ब्लीडिंग शुरू हो सकती है।
अगर कुछ मिनट तक हल्का दबाव देने के बावजूद खून बहना बंद नहीं हो रहा है, तो इसे इमरजेंसी मानकर तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।
घाव को कैसे साफ करें?
छोटे और सतही घाव को साफ नॉर्मल सलाइन से धीरे-धीरे साफ किया जा सकता है। घाव को रगड़ने या उसमें कोई चीज डालने की कोशिश न करें।
घाव पर शराब, परफ्यूम, फिनाइल, तेज केमिकल या घरेलू नुस्खे लगाने से बचें। कुछ पदार्थ पक्षियों की त्वचा और सांस की नली के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।
अगर पंख या पैर में चोट हो
अगर पक्षी का पंख या पैर असामान्य कोण पर दिखाई दे रहा है, तो उसे खुद सीधा करने की कोशिश न करें। हड्डी टूटने की स्थिति में गलत तरीके से बांधने या खींचने से चोट और गंभीर हो सकती है।
ऐसे पक्षी को ज्यादा उड़ाने या चलाने की कोशिश भी न करें। उसे सुरक्षित बॉक्स में रखकर जल्द से जल्द पशु चिकित्सक के पास ले जाएं।
पक्षी को गर्म और शांत रखें
चोट लगने के बाद पक्षी को तनाव और शॉक हो सकता है। इसलिए उसे शांत वातावरण में रखें और अनावश्यक रूप से हाथ में लेकर जांचते न रहें।
कमजोर या घायल पक्षी को आरामदायक तापमान में रखना मददगार हो सकता है, लेकिन उसे बहुत ज्यादा गर्म भी न करें। अगर पक्षी हांफ रहा है या मुंह खोलकर सांस ले रहा है, तो अतिरिक्त गर्मी देने से बचें।
जबरदस्ती खाना-पानी न दें
घायल या बेहोश पक्षी को जबरदस्ती पानी या खाना पिलाने की कोशिश न करें। ऐसा करने पर खाना या पानी उसकी सांस की नली में जा सकता है।
अगर पक्षी पूरी तरह होश में है और सामान्य तरीके से निगल पा रहा है, तो उसके पास पानी और उसका सामान्य भोजन रखा जा सकता है।
बिल्ली या कुत्ते ने हमला किया हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
अगर किसी पक्षी को बिल्ली या कुत्ते ने काटा, पंजा मारा या मुंह में पकड़ा है, तो बाहर से चोट छोटी दिखने के बावजूद इसे गंभीरता से लें। ऐसे मामलों में संक्रमण का जोखिम हो सकता है।
ऐसे पक्षी को जल्द से जल्द पशु चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। केवल घाव साफ करके घर पर छोड़ देना पर्याप्त नहीं हो सकता।
इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर चोट के बाद पक्षी में इनमें से कोई संकेत दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें:
- लगातार खून निकलना
- सांस लेने में परेशानी
- मुंह खोलकर सांस लेना
- बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी
- खड़ा न हो पाना
- पंख या पैर का असामान्य स्थिति में होना
- सिर या आंख पर गंभीर चोट
- हड्डी दिखाई देना
- लगातार आंखें बंद करके बैठे रहना
- संतुलन बनाने में परेशानी
पक्षी को बार-बार पकड़ने से बचें
घायल पक्षी को पकड़कर बार-बार उसकी चोट देखने से उसका तनाव बढ़ सकता है। उसे केवल जरूरत पड़ने पर ही संभालें। पकड़ते समय उसकी छाती पर दबाव न डालें, क्योंकि पक्षी को सांस लेने के लिए छाती और शरीर की सामान्य गति की जरूरत होती है।
किसी पक्षी को चोट लगने पर सबसे जरूरी है कि उसे शांत, सुरक्षित और कम तनाव वाले वातावरण में रखा जाए। छोटे घाव में सलाइन से सफाई और ब्लीडिंग होने पर हल्का दबाव जैसी शुरुआती मदद दी जा सकती है। लेकिन फ्रैक्चर, गंभीर रक्तस्राव, सांस की समस्या, सिर की चोट या बिल्ली-कुत्ते के हमले की स्थिति में घरेलू फर्स्ट एड पर निर्भर न रहें और तुरंत पशु चिकित्सक की मदद लें।