Cockatoo
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Cockatoo
Cockatoo: कॉकटू बेहद बुद्धिमान, सामाजिक और इंसानों से जल्दी जुड़ने वाला पक्षी है। यही वजह है कि उसे लंबे समय तक अकेला रखना उसकी सेहत और व्यवहार पर असर डाल सकता है। अगर आप घर में कॉकटू पालते हैं और नौकरी या किसी दूसरे काम के कारण बाहर रहते हैं, तो यह समझना जरूरी है कि वह कितनी देर तक अकेला रह सकता है और इस दौरान उसकी जरूरतों का कैसे ध्यान रखा जाए।
एक स्वस्थ और अच्छी तरह से अभ्यस्त कॉकटू को कभी-कभार कुछ घंटों के लिए अकेला छोड़ा जा सकता है। हालांकि, हर दिन लंबे समय तक अकेला छोड़ना सही नहीं माना जाता। व्यावहारिक तौर पर कोशिश करें कि कॉकटू को दिन में लगभग 4-6 घंटे से ज्यादा लगातार अकेला न रहना पड़े। छोटे या बहुत ज्यादा इंसानों पर निर्भर कॉकटू को इससे भी कम समय अकेला रखना बेहतर हो सकता है।कॉकटू की जरूरत उसके स्वभाव, उम्र, स्वास्थ्य, पिंजरे के वातावरण और इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह अकेले रहने का कितना आदी है।
कॉकटू को पर्याप्त सामाजिक संपर्क और मानसिक गतिविधि न मिलने पर वह बोर या तनावग्रस्त हो सकता है। कुछ पक्षियों में बहुत ज्यादा चीखना, बेचैनी, पंख नोचना, चोंच से चीजों को लगातार काटना या सुस्त रहना जैसे व्यवहार दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, इन लक्षणों के पीछे बीमारी सहित अन्य कारण भी हो सकते हैं।
अगर आपको कुछ घंटों के लिए घर से बाहर जाना पड़ता है, तो कॉकटू के पास सुरक्षित खिलौने, चबाने के लिए उपयुक्त चीजें और भोजन खोजने वाली गतिविधियां रखें। खिलौनों को समय-समय पर बदलते रहें, ताकि पक्षी का उनमें रुचि बनी रहे। घर लौटने के बाद उसे पर्याप्त इंटरैक्शन, खेल और उड़ने/व्यायाम का सुरक्षित समय देना भी जरूरी है।
सिर्फ इसलिए दूसरा कॉकटू लेना जरूरी नहीं है कि आपका पक्षी कुछ समय अकेला रहता है। दो पक्षियों को साथ रखने के लिए सही परिचय, पर्याप्त जगह और उनकी आपसी अनुकूलता जरूरी होती है। नया पक्षी लाने से पहले एवियन वेटरिनरी डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
अगर कॉकटू अचानक बहुत ज्यादा चिल्लाने लगे, लगातार पंख नोचे, खाना कम कर दे, असामान्य रूप से शांत रहे या उसकी बीट और व्यवहार में अचानक बदलाव आए, तो इसे केवल अकेलेपन की वजह मानकर नजरअंदाज न करें। बीमारी की संभावना को दूर करने के लिए एवियन वेटरिनरी डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। कॉकटू को कुछ घंटों के लिए अकेला छोड़ा जा सकता है, लेकिन उसे रोजाना लंबे समय तक अकेला रखना उसकी मानसिक और शारीरिक भलाई के लिए अच्छा नहीं है। उसके लिए सुरक्षित वातावरण, मानसिक व्यस्तता और रोजाना पर्याप्त सामाजिक समय सुनिश्चित करें।
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