Budgerigar
Budgerigar Care: बजरीगर (Budgerigar) पालने वाले लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि मादा बजरीगर के अंडे देने के बाद उनमें से बच्चा कितने दिन में बाहर आता है। सामान्य परिस्थितियों में बजरीगर के निषेचित अंडे से चूजा करीब 18 दिन में निकलता है, लेकिन यह समय इस बात पर निर्भर करता है कि मादा ने नियमित रूप से अंडे सेने की शुरुआत कब की है।अंडे देने के बाद मादा अक्सर दूसरे या तीसरे अंडे के आसपास नियमित रूप से उन पर बैठना शुरू करती है। इसलिए केवल अंडा दिए जाने की तारीख से दिन गिनने पर कभी-कभी गणना अलग दिखाई दे सकती है।
बजरीगर के अंडे से बच्चा कितने दिन में निकलता है?
सामान्य तौर पर लगभग 18 दिन की इनक्यूबेशन अवधि के बाद स्वस्थ और निषेचित अंडे से बच्चा निकल सकता है। कुछ मामलों में हैचिंग में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।बजरीगर एक साथ सभी अंडे नहीं देती। आमतौर पर अंडे लगभग एक-एक दिन के अंतराल पर दिए जाते हैं, इसलिए घोंसले में अलग-अलग उम्र के अंडे और बाद में अलग-अलग उम्र के चूजे दिखाई दे सकते हैं।
मादा बजरीगर अंडों पर कब बैठना शुरू करती है?
मादा कई बार पहला अंडा देने के तुरंत बाद लगातार नहीं बैठती। वह दूसरे या तीसरे अंडे के बाद नियमित रूप से इनक्यूबेशन शुरू कर सकती है। इसी वजह से पहले अंडे से चूजा निकलने का समय केवल अंडा दिए जाने के दिन से 18 दिन गिनने पर हमेशा सटीक नहीं होता।
अंडे के अंदर बच्चा कैसे विकसित होता है?
निषेचित अंडे के अंदर धीरे-धीरे भ्रूण विकसित होता है। इनक्यूबेशन शुरू होने के कुछ दिनों बाद अंडे की जांच करने पर रक्त वाहिकाएं दिखाई दे सकती हैं। लगभग पांचवें दिन के बाद कैंडलिंग के जरिए अंडे की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।हालांकि, अंडे को बार-बार हाथ में लेने या लंबे समय तक बाहर रखने से बचना चाहिए। खासकर इनक्यूबेशन के शुरुआती दिनों में अनावश्यक छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।
अंडे से बच्चा निकलने से पहले कौन से संकेत दिखाई देते हैं?
हैचिंग के करीब पहुंचने पर अंडे के अंदर चूजे की हलचल या आवाज सुनाई दे सकती है। इसके बाद चूजा अपनी चोंच पर मौजूद छोटे से एग टूथ की मदद से अंडे के खोल को तोड़ना शुरू करता है।खोल में छोटा छेद बनने के बाद चूजे को बाहर निकलने में कई घंटे लग सकते हैं। इसलिए अंडे में दरार दिखाई देते ही उसे खोलकर बच्चा निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
क्या सभी अंडों से बच्चे निकलते हैं?
नहीं। हर अंडा जरूरी नहीं कि निषेचित हो। अगर अंडा निषेचित नहीं है तो उसमें भ्रूण विकसित नहीं होगा और उससे चूजा नहीं निकलेगा।कैंडलिंग के दौरान निषेचित अंडे में समय के साथ रक्त वाहिकाएं और विकसित होता भ्रूण दिखाई दे सकता है, जबकि इनफर्टाइल अंडा अपेक्षाकृत साफ दिखाई दे सकता है।
अंडे सेने के दौरान बजरीगर की देखभाल कैसे करें?
1. घोंसले को बार-बार न छेड़ें
मादा को अंडों पर शांति से बैठने दें। बार-बार घोंसला खोलने या अंडों को हाथ लगाने से बचें।
2. संतुलित आहार दें
ब्रीडिंग के दौरान माता-पिता को पर्याप्त पोषण मिलना जरूरी है। साफ पानी हमेशा उपलब्ध रखें और प्रजाति के अनुसार संतुलित आहार दें।
3. कैल्शियम का ध्यान रखें
अंडे बनाने और प्रजनन के दौरान मादा की पोषण संबंधी जरूरतें बढ़ सकती हैं। पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों की व्यवस्था की जा सकती है।
4. वातावरण शांत रखें
पिंजरे को ऐसी जगह रखें जहां अत्यधिक शोर, लगातार आवाजाही या दूसरे पालतू जानवरों से तनाव न हो।
5. तापमान में अचानक बदलाव से बचें
अंडों और छोटे चूजों के दौरान वातावरण को स्थिर और आरामदायक रखना बेहतर होता है।
अगर 18 दिन बाद भी बच्चा न निकले तो क्या करें?
18 दिन पूरा होने के बाद भी तुरंत यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि अंडा खराब है। इनक्यूबेशन कब नियमित रूप से शुरू हुआ था, यह बहुत महत्वपूर्ण है। कुछ अंडों में हैचिंग थोड़ी देर से भी हो सकती है।अगर काफी समय बीत जाने के बाद भी कोई विकास या हैचिंग के संकेत नहीं हैं, तो अनुभवी एवियन/बर्ड वेटरिनरी डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। अंडे को खुद तोड़कर चूजे को निकालने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे जीवित भ्रूण को नुकसान पहुंच सकता है।
बच्चा निकलने के बाद क्या होता है?
बजरीगर का नवजात चूजा बेहद छोटा, कमजोर और पूरी तरह माता-पिता पर निर्भर होता है। शुरुआत में उसे गर्मी और भोजन दोनों की जरूरत होती है। सामान्य परिस्थितियों में माता-पिता ही चूजे की देखभाल और उसे खाना खिलाते हैं।चूजा धीरे-धीरे बड़ा होता है और कुछ सप्ताह में घोंसले से बाहर आने लगता है। लगभग 30–35 दिनों के आसपास वह घोंसले से बाहर निकल सकता है, हालांकि विकास की गति अलग-अलग पक्षियों में अलग हो सकती है।
बजरीगर के निषेचित अंडे से सामान्यतः करीब 18 दिनों में बच्चा निकलता है। हालांकि, यह अवधि अंडा देने और नियमित इनक्यूबेशन शुरू होने के समय के आधार पर थोड़ी बदल सकती है। अंडे सेने के दौरान घोंसले को अनावश्यक रूप से न छेड़ें, माता-पिता को संतुलित आहार और साफ पानी दें और हैचिंग के समय चूजे को खुद बाहर निकलने दें। अगर अंडे या चूजे की स्थिति को लेकर संदेह हो, तो पक्षियों के इलाज में अनुभवी पशु चिकित्सक की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।