Wild Animals
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अधिकतर जंगली जानवर रात में इसलिए एक्टिव होते हैं क्योंकि अंधेरे में शिकार करना आसान हो जाता है। रात के समय शिकार बनने वाले जानवरों की नजर कमजोर पड़ जाती है, जिससे शिकारी जानवर आसानी से हमला कर पाते हैं।
शेर और तेंदुए जैसे जानवरों की आंखें अंधेरे में भी साफ देखने के लिए बनी होती हैं। उनकी आंखों में खास सेल्स होते हैं, जो कम रोशनी में भी बेहतर विजन देते हैं।
कई जंगली इलाकों में दिन के समय बहुत ज्यादा गर्मी होती है। ऐसे में जानवर अपनी ऊर्जा बचाने के लिए दिन में आराम करते हैं और रात में बाहर निकलते हैं। इससे उनके शरीर का तापमान भी संतुलित रहता है।
रेगिस्तानी और जंगलों में रहने वाले कई जानवर इसी वजह से निशाचर (Nocturnal) बन गए हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि कई जंगली जानवर इंसानी गतिविधियों से बचने के लिए भी रात में ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। दिन में जंगलों के आसपास इंसानों की आवाजाही, गाड़ियां और शोर ज्यादा होता है। इसलिए जानवर रात के शांत माहौल में बाहर निकलना सुरक्षित समझते हैं।
रात में एक्टिव रहने वाले जानवरों की सुनने और सूंघने की शक्ति बेहद तेज होती है। अंधेरे में वे अपने शिकार या खतरे का पता आवाज और गंध से लगा लेते हैं।
उदाहरण के लिए, भेड़िये और लकड़बग्घे कई किलोमीटर दूर से गंध पहचान सकते हैं।
यह जरूरी नहीं कि हर जंगली जानवर निशाचर हो। कुछ जानवर दिन में सक्रिय रहते हैं, जैसे हाथी और हिरण। वहीं कुछ जानवर सुबह और शाम के समय ज्यादा एक्टिव होते हैं, जिन्हें Crepuscular कहा जाता है।
जंगली जानवरों का रात में ज्यादा एक्टिव होना उनकी सुरक्षा, शिकार और मौसम से जुड़ा प्राकृतिक व्यवहार है। अंधेरे में बेहतर नजर, तेज सुनने की क्षमता और ठंडा वातावरण उन्हें रात में ज्यादा ताकतवर बना देता है। यही वजह है कि जंगल की असली हलचल अक्सर रात होते ही शुरू होती है।
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