lion climbing trees
lion Facts: शेर (Lion) को जंगल का राजा कहा जाता है. उसकी एक दहाड़ पूरे जंगल में डर पैदा कर सकती है. ताकत, गति और शिकार करने की क्षमता के मामले में शेर का मुकाबला करना आसान नहीं है. लेकिन जब बात पेड़ों पर चढ़ने की आती है, तो जंगल का यह राजा काफी पीछे रह जाता है.
दिलचस्प बात यह है कि कई छोटे जानवर और यहां तक कि तेंदुआ (Leopard) भी आसानी से पेड़ों पर चढ़ जाता है, लेकिन शेर ऐसा नहीं कर पाता. आखिर इसके पीछे क्या कारण है? आइए विस्तार से समझते हैं.
शेर का भारी शरीर है सबसे बड़ी वजह
एक वयस्क नर शेर का वजन 150 से 250 किलोग्राम तक हो सकता है. इतना भारी शरीर पेड़ों पर चढ़ने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता.
पेड़ों पर चढ़ने के लिए जानवर को शरीर का संतुलन बनाए रखना पड़ता है.मजबूत पकड़ की जरूरत होती है.वजन को ऊपर खींचने की क्षमता चाहिए.शेर का भारी और मांसल शरीर उसे इस काम में मुश्किल पैदा करता है.
तेंदुए और शेर में क्या अंतर है?
तेंदुआ शेर की तुलना में काफी हल्का और फुर्तीला होता है. उसका शरीर पेड़ों पर चढ़ने के लिए ज्यादा अनुकूल होता है.
तेंदुए की खासियत
- हल्का वजन
- मजबूत पंजे
- लंबी पूंछ से संतुलन
- पेड़ों पर तेजी से चढ़ने की क्षमता
इसी कारण तेंदुआ अपने शिकार को भी पेड़ पर ले जाकर सुरक्षित रख सकता है, जबकि शेर ऐसा नहीं कर पाता.
पंजों की बनावट भी है जिम्मेदार
शेर के पंजे मुख्य रूप से जमीन पर दौड़ने और बड़े शिकार को पकड़ने के लिए विकसित हुए हैं. उसके पंजों में ताकत तो बहुत होती है, लेकिन पेड़ की छाल को मजबूती से पकड़कर ऊपर चढ़ने की क्षमता सीमित होती है.यही वजह है कि शेर को पेड़ों पर चढ़ने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है.
क्या शेर कभी पेड़ पर नहीं चढ़ता?
ऐसा बिल्कुल नहीं है. अफ्रीका के कुछ इलाकों में पाए जाने वाले शेर कभी-कभी पेड़ों पर चढ़ते देखे गए हैं.विशेष रूप से तेज गर्मी से बचने के लिए,कीड़ों और मक्खियों से दूर रहने के लिए,आसपास का नजारा देखने के लिए.हालांकि वे तेंदुए या बंदरों की तरह आसानी से और बार-बार पेड़ों पर नहीं चढ़ते.
पूंछ का संतुलन भी निभाता है अहम भूमिका
पेड़ों पर चढ़ने वाले जानवरों की पूंछ संतुलन बनाए रखने में मदद करती है. तेंदुए की पूंछ अपेक्षाकृत लंबी और अधिक लचीली होती है.शेर की पूंछ संतुलन में मदद जरूर करती है, लेकिन उसका भारी शरीर इस लाभ को काफी हद तक कम कर देता है.
शेर को पेड़ों पर चढ़ने की जरूरत ही नहीं पड़ती
प्रकृति हर जीव को उसकी जरूरत के अनुसार विकसित करती है. शेर समूह में शिकार करता है और जमीन पर रहने वाला शिकारी है.उसे शिकार के लिए पेड़ों पर जाने की जरूरत नहीं होती.भोजन छिपाने की आवश्यकता कम होती है.समूह की सुरक्षा मिलती है.इसलिए समय के साथ उसका शरीर जमीन पर शिकार करने के लिए अधिक विकसित हुआ, न कि पेड़ों पर चढ़ने के लिए.
क्या पेड़ों पर चढ़ना शेर के लिए खतरनाक हो सकता है?
हां. भारी शरीर के कारण ऊंचाई से गिरने पर शेर को गंभीर चोट लग सकती है. यही कारण है कि अधिकांश शेर अनावश्यक रूप से पेड़ों पर चढ़ने से बचते हैं.शेर पेड़ों पर नहीं चढ़ पाता, इसका मतलब यह नहीं कि वह कमजोर है. दरअसल उसका भारी शरीर, पंजों की बनावट और जमीन पर शिकार करने की आदत उसे पेड़ों पर चढ़ने के लिए कम उपयुक्त बनाती है. जबकि तेंदुआ जैसे जानवर इस काम के लिए प्राकृतिक रूप से बेहतर बने होते हैं. इसलिए जंगल का राजा होने के बावजूद शेर की असली ताकत जमीन पर ही दिखाई देती है, पेड़ों की ऊंचाइयों पर नहीं.