Pigon
Pigon Care:अगर कबूतर की नाक से बार-बार पानी या किसी तरह का तरल पदार्थ निकल रहा है, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार धूल, ठंडी हवा या वातावरण में बदलाव की वजह से भी ऐसा हो सकता है, लेकिन लगातार नाक बहना कबूतर में सांस से जुड़ी बीमारी या संक्रमण का संकेत भी हो सकता है। खासकर जब इसके साथ छींक, सांस लेने में आवाज, सुस्ती या भूख कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें।
सांस की बीमारी का हो सकता है संकेत
कबूतर की नाक से पानी आने का एक कारण श्वसन तंत्र में संक्रमण हो सकता है। बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण के अलावा कुछ अन्य रोग भी कबूतर की सांस की नली और नाक को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में नाक से निकलने वाला तरल धीरे-धीरे गाढ़ा भी हो सकता है। कबूतर को सांस लेने में परेशानी हो सकती है और वह सामान्य से ज्यादा सुस्त नजर आ सकता है।
ट्राइकोमोनिएसिस में भी दिख सकते हैं ऐसे लक्षण
कबूतरों में ट्राइकोमोनिएसिस एक आम बीमारी है। इसमें मुंह और गले के अंदर पीले या सफेद रंग की परत, गांठ या घाव दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में निगलने और सांस लेने में परेशानी होने की वजह से नाक के आसपास भी स्राव नजर आ सकता है। अगर नाक बहने के साथ कबूतर के मुंह में असामान्य परत या घाव दिखाई दे रहे हैं, तो पशु चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है।
कब चिंता करनी चाहिए?
अगर कबूतर की नाक से सिर्फ थोड़ी देर के लिए पानी आया और वह बाकी समय सामान्य है, तो तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर नाक लगातार बह रही है, स्राव गाढ़ा या पीला-हरा है, कबूतर बार-बार छींक रहा है, सांस लेते समय आवाज आ रही है, मुंह खोलकर सांस ले रहा है, खाना कम कर दिया है या पंख फुलाकर बैठा रहता है, तो यह बीमारी का संकेत हो सकता है।
कबूतर का इलाज खुद न करें
नाक से पानी आने का कारण केवल लक्षण देखकर निश्चित नहीं किया जा सकता। अलग-अलग संक्रमण में अलग इलाज की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए बिना पशु चिकित्सक की सलाह के एंटीबायोटिक या कोई दूसरी दवा देना सही नहीं है। बीमार कबूतर को स्वस्थ पक्षियों से अलग रखें और उसके पानी व खाने के बर्तन साफ रखें।
अगर नाक से पानी आने के साथ सांस लेने में गंभीर परेशानी, लगातार मुंह खोलकर सांस लेना या अत्यधिक कमजोरी दिखाई दे रही है, तो जल्द से जल्द पक्षी विशेषज्ञ पशु चिकित्सक से संपर्क करें।